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GBP/USD मुद्रा जोड़ी में शुक्रवार को कोई नई गिरावट नहीं हुई और पूरे दिन यह लगभग स्थिर बनी रही। यह स्थिति तब भी रही, जबकि उस दिन बड़ी मात्रा में मैक्रोइकॉनॉमिक (Macro-economic) आँकड़े जारी किए गए, जिनमें से अधिकांश ने ब्रिटिश पाउंड का समर्थन किया।
हालाँकि, तीन सप्ताह की तेजी के बाद पाउंड अभी भी गिरावट वाले सुधार (Descending Correction) के दौर में है।
कुल मिलाकर, ब्रिटिश मुद्रा में हालिया गिरावट को पूरी तरह से तर्कसंगत कहना मुश्किल है। याद रखें कि यूरो के विपरीत, पाउंड ने लगातार तीन सप्ताह तक मजबूती दिखाई थी। इसलिए तकनीकी आधार पर हल्की गिरावट या सुधार पूरी तरह उचित था। और वास्तव में ऐसा सुधार देखने को मिला।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि ब्रिटेन में महँगाई (Inflation) अभी भी धीमी हो रही है और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों का उस पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है।
हालाँकि, जून में बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England - BoE) ने स्पष्ट संकेत दिया था कि वह मौद्रिक नीति को सख्त करने (Tightening) के पक्ष में नहीं है। इसलिए महँगाई में गिरावट को इस बात का संकेत नहीं माना जा सकता कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी छोड़ रहा है, क्योंकि वास्तव में BoE अभी किसी भी दर वृद्धि की योजना नहीं बना रहा है।
इसके बजाय, अब BoE दोबारा मौद्रिक नीति में ढील (Easing Policy) की ओर बढ़ सकता है। और यही पाउंड में गिरावट का एक महत्वपूर्ण कारण है।
लेकिन सवाल यह है कि इसका प्रभाव कितना बड़ा होगा?
इस बीच, ऐसा लग रहा है कि ईरान और अमेरिका दोनों ही संघर्ष से थक चुके हैं और बातचीत फिर से शुरू करना चाहते हैं। इस तरह मध्य पूर्व का यह "राजनीतिक नाटक" अभी जारी है।
डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर यह एहसास हुआ है कि केवल मिसाइलों और बमबारी से ईरान को बातचीत की मेज़ पर वापस नहीं लाया जा सकता और न ही तेहरान को अमेरिका की शर्तों वाला समझौता स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
इसलिए सैन्य कार्रवाई जारी रखना न केवल बेअसर है, बल्कि महँगा भी साबित हो रहा है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) पहले ही ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त फंडिंग की माँग कर चुके हैं, और इससे पहले ट्रंप भी ऐसी माँग कर चुके हैं।
हालाँकि अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास कांग्रेस में बहुमत है, इसलिए अतिरिक्त फंडिंग संभव है। लेकिन नवंबर तक रिपब्लिकन कम से कम एक सदन में अपना बहुमत खो सकते हैं। इसके बाद ट्रंप के लिए ऐसे फैसले लेना आसान नहीं होगा जिन्हें केवल उनकी मंजूरी से लागू किया जा सके।
ट्रंप के सामने चुनौती यह है कि उन्हें युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करना है, लेकिन ऐसा जीत की स्थिति से करना चाहते हैं।
ईरान के साथ युद्ध जारी रखने से कोई समझौता नहीं होगा। इसलिए एकमात्र रास्ता फिर से बातचीत की मेज़ पर लौटना है।
लेखक का मानना है कि नई वार्ता सफल होगी, ऐसा निश्चित नहीं है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि तेहरान और वॉशिंगटन दोनों एक तरह के गतिरोध (Deadlock) में फँसे हुए हैं।
इसी वजह से यह स्थिति बार-बार बदलती रहती है—कभी दोनों पक्ष फिर से मिसाइल हमले शुरू करते हैं, तो कभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने लौट आते हैं। किसी भी दिशा में अभी कोई स्थायी समाधान दिखाई नहीं दे रहा है।
औपचारिक रूप से देखें तो हाँ, ऐसा संभव है। बाज़ार किसी भी कारण को आधार बनाकर अमेरिकी मुद्रा खरीदना जारी रख सकता है और उन कारणों को नज़रअंदाज़ कर सकता है जो उसके पक्ष में नहीं हैं।
यह याद रखना चाहिए कि बाज़ार किसी की इच्छा के अनुसार चलने के लिए बाध्य नहीं है और न ही उसकी चाल हमेशा मौलिक परिस्थितियों (Fundamentals) या भू-राजनीतिक घटनाओं के अनुरूप होती है।
फिर भी, लेखक का मानना है कि अमेरिकी डॉलर में आगे और बड़ी मजबूती के लिए अभी पर्याप्त तार्किक कारण दिखाई नहीं देते।
27 जुलाई तक पिछले पाँच ट्रेडिंग दिनों के आधार पर GBP/USD मुद्रा जोड़ी की औसत वोलैटिलिटी (Volatility) 69 पिप्स रही, जिसे इस जोड़ी के लिए "औसत (Average)" माना जाता है।
सोमवार, 27 जुलाई को अनुमान है कि यह मुद्रा जोड़ी 1.3252 और 1.3390 के बीच कारोबार कर सकती है।
ऊपरी रैखिक प्रतिगमन चैनल (Upper Linear Regression Channel) नीचे की ओर झुका हुआ है, जो संकेत देता है कि मंदी (Downtrend) का रुझान जारी रह सकता है।
CCI (Commodity Channel Index) संकेतक ने एक बेयरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence) बनाया है और यह ओवरबॉट (Overbought) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। यह संकेत देता है कि कीमतों में नीचे की ओर सुधार (Downward Correction) शुरू हो सकता है।
GBP/USD मुद्रा जोड़ी अभी भी ऊपरी रुझान (Uptrend) बनाए हुए है।
लेखक के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियाँ अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती रहेंगी, इसलिए अमेरिकी डॉलर में लंबे समय तक चलने वाली मजबूत वृद्धि की उम्मीद नहीं की जा रही है।
हालाँकि, 2026 में भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण डॉलर के लिए स्थिति बहुत सकारात्मक दिखाई दे रही है, लेकिन हर कहानी का एक अंत होता है।
साप्ताहिक (Weekly) टाइमफ्रेम पर अभी भी 1.3150 और 1.3780 के बीच एक सीमित दायरे (Flat Range) में कारोबार हो रहा है, जो पिछले चार वर्षों के तेजी वाले रुझान (Four-Year Uptrend) के अंदर है। इसलिए मध्यम अवधि (Medium Term) में ब्रिटिश पाउंड के आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
1. Linear Regression Channels (रैखिक प्रतिगमन चैनल):
ये मौजूदा ट्रेंड की पहचान करने में मदद करते हैं। यदि दोनों चैनल एक ही दिशा में होते हैं, तो इसका अर्थ है कि वर्तमान ट्रेंड मजबूत है।
2. Moving Average Line (20,0, Smoothed):
यह अल्पकालिक (Short-Term) ट्रेंड और ट्रेडिंग की दिशा निर्धारित करती है कि वर्तमान समय में किस दिशा में ट्रेड करना बेहतर है।
3. Murray Levels:
ये संभावित लक्ष्य स्तर (Target Levels) होते हैं, जिनका उपयोग कीमतों की चाल और सुधार (Correction) को समझने के लिए किया जाता है।
4. Volatility Levels (लाल रेखाएँ):
ये वर्तमान वोलैटिलिटी संकेतकों के आधार पर अगले 24 घंटों में मुद्रा जोड़ी के संभावित मूल्य दायरे (Price Channel) को दर्शाती हैं।
5. CCI Indicator (Commodity Channel Index):
इन दोनों स्थितियों में अक्सर विपरीत दिशा में ट्रेंड रिवर्सल (Trend Reversal) की संभावना का संकेत मिलता है।