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बुधवार को GBP/USD मुद्रा जोड़ी में लगभग 150 पिप्स की तेज़ बढ़त दर्ज की गई। ब्रिटिश पाउंड लगातार तीसरे सप्ताह मजबूत हो रहा है और हमारे अनुसार यह तेजी पूरी तरह उचित है।
याद रखें कि हमने कई बार यह कहा था कि अमेरिकी डॉलर की पिछली तेजी तर्कसंगत नहीं थी। साथ ही हमने यह भी बताया था कि GBP/USD मुद्रा जोड़ी दैनिक (Daily) और साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर पिछले एक वर्ष से बने साइडवेज़ (Sideways) चैनल की निचली सीमा पर कारोबार कर रही थी।
इसलिए मौजूदा तेजी को उचित मूल्य (Fair Value) की ओर वापसी और फ्लैट (Flat) की निचली सीमा के परीक्षण के बाद हुई तकनीकी चाल (Technical Move) माना जा सकता है।
हमारा मानना है कि 2026 में अमेरिकी डॉलर के पास उपलब्ध अधिकांश तेजी के कारक अब समाप्त हो चुके हैं। गिरावट के अंतिम चरण में बाजार ने मौलिक (Fundamental) और मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) आंकड़ों को लगभग नजरअंदाज कर दिया था और केवल डॉलर की खरीदारी कर रहा था।
हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह संभवतः मार्केट मेकर्स (Market Makers) की रणनीति हो सकती है, जिनका उद्देश्य पाउंड को जितना संभव हो उतना नीचे धकेलना था, ताकि बाद में कम कीमतों पर खरीदारी कर मजबूत तेजी का लाभ उठाया जा सके।
परिणामस्वरूप, पिछले तीन सप्ताह से हम ब्रिटिश पाउंड की लगातार मजबूती देख रहे हैं।
यदि मंगलवार की तेजी के पीछे पर्याप्त कारण मौजूद थे, तो बुधवार की 150 पिप्स की बढ़त को स्थानीय घटनाओं या आर्थिक रिपोर्टों से नहीं समझाया जा सकता। स्पष्ट रूप से उत्पादक मूल्य सूचकांक (Producer Price Index - PPI) के कारण पाउंड में इतनी बड़ी तेजी नहीं आई।
तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो ब्रिटिश पाउंड अभी भी अपने ऊपरी रुझान (Uptrend) में बना हुआ है। हमें कम से कम एक छोटी तकनीकी गिरावट (Correction) की उम्मीद थी, लेकिन कीमत Senkou Span B लाइन के नीचे स्थिर नहीं हो सकी। इसलिए अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला।
5-मिनट (5M) के चार्ट पर बुधवार को दो ट्रेडिंग सिग्नल बने।
ब्रिटिश पाउंड के लिए COT (Commitments of Traders) रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले कई महीनों से गैर-व्यावसायिक (Non-commercial) ट्रेडर्स की बाजार में बिकवाली (Sell) का दबदबा बना हुआ है। दीर्घकालिक तेजी (Long-term Uptrend) बरकरार रहने के बावजूद उनकी नेट पोज़िशन (Net Position) अभी भी नकारात्मक (Negative) है।
मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह आश्चर्यजनक नहीं है कि जोखिम वाली मुद्राओं (Risk Currencies) की मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। औपचारिक रूप से युद्ध समाप्त हो चुका है, लेकिन संघर्ष अभी भी जारी है। निकट भविष्य में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitics) अमेरिकी डॉलर की मांग को समर्थन दे सकता है।
हालांकि, जब तक कीमत ट्रेंड लाइन के नीचे मजबूती से नहीं टिकती, तब तक हमें GBP/USD में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।
दीर्घकाल (Long Term) में हमारा मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना रहेगा, जैसा कि साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
व्यापार युद्ध (Trade War) किसी न किसी रूप में लंबे समय तक जारी रह सकता है और ट्रंप की नीतियां प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की दिशा में काम करती हैं।
दीर्घकालिक अपट्रेंड (Uptrend) अभी भी पूरी तरह कायम है, जिसका प्रमाण ट्रेंड लाइन है। हाल ही में कीमत ने इस ट्रेंड लाइन का परीक्षण किया और वहां से उछाल (Bounce) दर्ज किया।
7 जुलाई की नवीनतम COT रिपोर्ट के अनुसार, "Non-commercial" श्रेणी के ट्रेडर्स ने:
इसके परिणामस्वरूप उनकी नेट पोज़िशन में एक सप्ताह के दौरान 14,200 कॉन्ट्रैक्ट की वृद्धि हुई। हालांकि, यह बदलाव पेशेवर ट्रेडर्स की समग्र बाजार धारणा (Overall Market Sentiment) पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं डालता।
प्रति घंटा (1H) चार्ट पर GBP/USD मुद्रा जोड़ी में अब तकनीकी सुधार (Correction) शुरू हो सकता है, क्योंकि इसकी तेजी लगातार तीन सप्ताह से जारी है। हालांकि, फिलहाल सुधार के पक्ष में कोई स्पष्ट तकनीकी या अन्य मजबूत कारण मौजूद नहीं हैं।
बाजार अब भी भू-राजनीतिक घटनाओं को काफी हद तक नजरअंदाज कर रहा है और पिछले तीन सप्ताह में जो तेजी देखने को मिली है, वह मुख्य रूप से तकनीकी (Technical) रही है।
यदि ब्रिटिश पाउंड अपनी मजबूती जारी रखता है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा, क्योंकि दैनिक (Daily) चार्ट पर यह साइडवेज़ (Sideways) चैनल की ऊपरी सीमा 1.3720–1.3800 की ओर बढ़ रहा है।
इसके अलावा:
ये दोनों Ichimoku Indicator की महत्वपूर्ण रेखाएं हैं और संभावित ट्रेडिंग सिग्नल प्रदान कर सकती हैं।
यदि कीमत सही दिशा में 20 पिप्स बढ़ जाती है, तो स्टॉप लॉस (Stop Loss) को ब्रेक-ईवन (Break-even) पर ले जाने की सलाह दी जाती है। इससे गलत सिग्नल की स्थिति में संभावित नुकसान सीमित किया जा सकता है।
ध्यान रखें कि Ichimoku Indicator की रेखाएं दिन के दौरान बदल सकती हैं, इसलिए ट्रेडिंग निर्णय लेते समय इन्हें लगातार अपडेट के साथ देखना चाहिए।
ब्रिटेन में मई महीने के GDP (सकल घरेलू उत्पाद) और औद्योगिक उत्पादन (Industrial Production) के आंकड़े जारी होंगे।
वहीं अमेरिका में:
के आंकड़े प्रकाशित किए जाएंगे।
इन चारों रिपोर्टों को द्वितीयक (Secondary) महत्व का माना जा सकता है। इनके कारण बाजार में हल्की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, लेकिन इनसे समग्र बाजार रुझान में बड़े बदलाव की संभावना कम है।